श्रेया न्यूज़ शहडोल सीमा सिंह :- जनहित में चलाए जा रहे अभियान ‘हर बूंद स्वच्छ, हर घूंट स्वस्थ्य’ के तहत वाटर क्वालिटी कंट्रोल के विशेषज्ञ के साथ टीडीएस मीटर पर घरों में नलों से भरे गए पानी की शुद्धता परखी, तो परिणाम चौंकाने वाले आए। शहर के स्नेह नगर, राइटटाउन, शास्त्री ब्रिज सहित अलग-अलग क्षेत्रों में टीडीएस उपकरण से पानी की शुद्धता जांची तो तय मानक से तीन गुना अधिक निकला।
जबलपुर। इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से हुई 17 मौतों के बाद नगर निगम ने पानी शुद्धता परखते हुए पाइललाइनों की जांच शुरू कर दी है। सैंपल लेकर पानी की शुद्धता के दावे भी किए जा रहे हैं, जबकि हकीकत यह है कि शहर की करीब 50 प्रतिशत आबादी को ही पूरी तरह से स्वच्छ पानी नहीं मिल पा रहा है। पेयजल की आपूर्ति करने वाली जलवितरण लाइन पिछले 50 सालों से नाला-नालियों के नीचे से गुजर रहीं जिन्हें बदलने की जहमत नही उठाई गई।
जनहित में चलाए जा अभियान ‘हर बूंद स्वच्छ, हर घूंट स्वस्थ्य’ के तहत वाटर क्वालिटी कंट्रोल के विशेषज्ञ के साथ टीडीएस मीटर पर घरों में नलों से भरे गए पानी की शुद्धता परखी, तो परिणाम चौंकाने वाले आए। शहर के स्नेह नगर, राइटटाउन, शास्त्री ब्रिज सहित अलग-अलग क्षेत्रों में टोटल डिजाल्व्ड सालिड्स (टीडीएस) उपकरण से पानी की शुद्धता जांची तो पानी में टीडीएस की मात्रा तय मानक से तीन गुना अधिक निकली। समान्य रूप से पानी में टीडीएस की मात्रा 70 से 250 के बीच होनी चाहिए तभी पानी शुद्ध माना हैं परंतु इन क्षेत्रों में यह मात्रा 600 के ऊपर दर्ज की गई। जबकि इन क्षेत्रों में नलों के माध्यम से नर्मदा जल की आपूर्ति की जाती है।
टीडीएस का स्तर बढ़ा होने होना है स्वास्थ्य के लिए घातक
वाटर क्वालिटी विशेषज्ञ डॉ. विनोद दुबे ने बताया कि पानी को शुद्ध करने वाले उपकरण और नगर निगम के पानी के परीक्षण में ये टीडीएस में अंतर का कारण यही है कि नगर निगम की जलापूर्ति नाला-नालियों से होकर गुजर रही पाइपलाइन के माध्यम से हो रही है। 40-50 वर्षों से लगातार क्षारीय पानी में रहने से पाइपलाइन में क्षरण हो रहा है और लीकेज के माध्यम से ये गंदा पानी साफ पानी के साथ लोगों के घरों में पहुंच रहा है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार पानी में टीडीएस का स्तर 70 से 250 के भीतर होना चाहिए इससे अधिक तो सेहत के लिए नुकसान दायक है। लंबे समय तक उच्च टीडीएस वाला पानी पीने से किडनी की पथरी का खतरा बढ़ सकता है। इसमें आर्सेनिक, फ्लोराइड या लेड शरीर में जमा होकर अंगों को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
नर्मदा तट पर टीडीएस 243
नगर निगम द्वारा जलशोधन संयंत्र में पानी को स्वच्छ कर राइजिंग मेनलाइन के माध्यम से टंकियों तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद पाइपलाइन के माध्यम से शहर में एक लाख 70 हजार घरों में नर्मदा से आपूर्ति की जाती है। परीक्षण के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों में घरों में नलों से आने वाले नर्मदा जल में टीडीएस का स्तर 600 के पार रहा वहीं गौरीघाट स्थित नर्मदा नदी का जल परीक्षण भी किया। गौरीघाट के उमाघाट पर नर्मदा जल में टीडीएस 254 रही। 250 से कम रहा परंतु 200 से ऊपर इसलिए रहा क्योंकि घाट पर लोग स्नान आदि भी क्रियाएं भी कर रहे थे।
300 मीटर के दायरे में बदलती रही पेयजल की गुणवत्ता
पिछले 40 वर्षों से नगर निगम के साथ जनहित में कार्य रहे वाटर क्वालिटी कंट्रोल विशेषज्ञ डा. विनोद दुबे के साथ स्नेह नगर क्षेत्र में टीडीएस मीटर से सबसे पहले उन्हें के घर पर नगर निगम द्वारा आपूर्ति किए गए जाने पानी की शुद्धता का परीक्षण किया।
इसके बाद वाटर प्यूरी फायर से शुद्ध किए गए पानी की गुणवत्ता मापी। परिणाम चौंकाने वाले आए। नलों से आने आए पानी में टीडीएस का स्तर 653 रहा जबकि वाटर प्यूरी फायर के पानी का स्तर 187 दर्ज किया गया। यानि नगर निगम द्वारा आपूर्ति किए जाने वाले पानी बिना उबाले या वाटर प्यूरीफायर के पीना सेहत खराब करना है।
अनिका अपार्टमेंट में टीडीएस का स्तर 734 दर्ज किया
इसी तरह राइट टाउन में शास्त्री ब्रिज के समीप स्थित अनिका अपार्टमेंट भी अंशु राय के प्लैट में नगर निगम के द्वारा की जाने वाली जलापूर्ति की जांच पड़ताल की गई। यहां नगर निगम के पानी में टीडीएस का स्तर 734 दर्ज किया गया। यहां भी ज्यादातर पाइपलाइन गंदे पानी की नालियों से होकर गुजर रही हैं। इन्हीं पाइपलाइन से अपार्टमेंट में जलापूर्ति होती है।
स्नेह नगर में टीडीएस की मात्रा 696 प्रदर्शित
स्नेह नगर में ही करीब 200 मीटर दूर शंकुतला शर्मा के घर पर नगर निगम द्वारा सप्लाई किए जाने वाले पानी की गुणवत्ता परखी। यहां पानी में टीडीएस की मात्रा 696 प्रदर्शित हुई। इसके बाद भी 100 मीटर दूर और संजय साहू के घर भी नगर निगम के पाइपाइन लाइन से आने वाले नर्मदा जल का परीक्षण किया तो टीडीएस का स्तर 685 दर्ज किया गया। यानि 300 मीटर के दायरे में पानी की शुद्धता के मापदंड बदलते रहे।
पाइपलाइन बदली जा रही है
नगर निगम द्वारा पानी की गुणवत्ता सुधारने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। जोन स्तर पर नाला-नालियों के भीतर से गुजर रही पाइपलाइनों की निगरानी करने और उन्हे ऊपर करने कहा गया है। जहां लीकेज की समस्या आ रही वहां पाइपलाइन बदली जा रही है। नगर निगम की लैब से पानी की गुणवत्ता की जांच पड़ताल भी कराई जा रही है। – कमलेश श्रीवास्तव कार्यपालन यंत्री, जल, नगर निगम







