श्रेया न्यूज़ शहडोल नीलू राठौर :- शहडोलः जिला अस्पताल में मरीजो को राहत देने और डाक्टर केबिन के आगे लगने वाली भीड को कम करने के उद्देश्य से टोकन व्यवस्था शुरू की गई थी, लेकिन यह व्यवस्था शुरू होते ही चरमरा गई और फिर से ओपीडी में मरीजों को वहीं पुराने ढरें पर आकर सेवाएं लेनी पड रही हैं।
हालत यह है कि यहां पर टोकन मशीन के सामने जिस कर्मचारी को बैठाया गया है, वह भी किसी काम का नहीं है। यहां पर डाक्टर केबिन के बाहर लगे मानीटर पर जीरो जीरो ही नजर आता है। यानी टोकन का कोई मतलब नहीं रह गया हैं। डाक्टर कुर्सी पर बैठते ही वैसे ही लाइन चेंबर के आगे लग जाती है, जैसे पहले लगा करती थी।
यह हाल है ओपीडी काः गर्मी अधिक होने के कारण ओपीडी में कई लोग तो सिर्फ एसी का हवा खाने के लिए बैठे रहते हैं और यहां भीड़ बढाने का काम करते हैं। हालत यह है कि जहां एक ओर डाक्टर समय पर नहीं बैठ रहे तो वहीं दूसरी और जितने समय वह बैठते हैं, उतने समय मरीजों की लंबी लाइन उनके आगे लग जाती है। टोकन व्यवस्था को दुरूस्त करने ध्यान नहीं दिया जा रहा है। वहीं कई डाक्टरों का कहना है कि टोकन व्यवस्था यहां पर सफल नहीं हो सकती हैं, क्योंकि गांव देहात से ज्यादा लोग आते हैं और उनको इस बात का पता नहीं रहता है कि उनको कहां जाना है और कहां नहीं जाना है।
जिसकी लगाई डयूटी वह किसी काम का नहीं : टोकन मशीन की जिम्मेदारी जिस कर्मचारी को दी गई है वह भी किसी काम का नहीं है। कुल मिलाकर इस व्यवस्था की दबाव में शुरू तो कर दिया गया है पर यह व्यवस्था शुरू होते ही दम तोड़ चुकी है। बडे शहरों के मेट्रो अस्पतालों की तरह इस व्यवस्था को भीड़ कंट्रोल करने के लिए बनाया गया था पर हालत कुछ और ही हो गया है। यहां पर फिलहाल डाक्टर के सामने वहीं पुरानी स्थिति है जैसी पहले थी। चेंबर में अगर एसी न लगा हो तो डाक्टर इस तरह की भीड़ को एक मिनट भी सहन नहीं कर पाएगा।
मरीज अभी भी होते हैं परेशानः जिला अस्पताल में सुविधाओं को विस्तार भले ही होता जा रहा है, लेकिन यहां के हालात जिनको सुधारने हैं वह स्वयं नहीं चाहते हैं कि स्थिति सुधरे। डाक्टरों का आलम यह है कि वह 11 बजे के पहले अस्पताल पहुंचना नहीं चाहते, जबकि डयूटी का टाइम नौ बजे शुरू हो जाता है। सुबह 11 बजे आने के बाद वह राउंड पर निकल जाते हैं, ऐसे में मरीज को देखने का समय मुश्किल से उनके पास एक से डेढ घंटे ही रहता है। अब ऐसे में मरीज भी यहां आकर परेशानी का अनुभव करते हैं। गर्मी का समय है और जो मरीज दूरदराज से सुबह ही इलाज के लिए पहुंच जाते हैं उनको डाक्टर को दिखाने में समय लग जाता है।







