श्रेया न्यूज़ शहडोल नीलू राठौर :- जबलपुर। सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था सुधारने और बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल देने के दावों के बीच नुनसर के एक सरकारी स्कूल की स्थिति ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक ही कमरे में तीन कक्षाओं के बच्चों को बैठाकर एक शिक्षिका पढ़ाती मिलीं।
निरीक्षण के दौरान जब अधिकारियों ने इसकी वजह जानी तो सामने आया कि स्कूल में पदस्थ तीन शिक्षकों में से एक शिक्षिका मातृत्व अवकाश पर हैं, जबकि दूसरे शिक्षक की ड्यूटी साक्षरता अभियान में लगी हुई है। नतीजा यह रहा कि एक शिक्षिका के भरोसे तीन कक्षाओं की पढ़ाई चल रही थी।
मामला मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के तहत एकीकृत शासकीय माध्यमिक शाला उजरोड़, नुनसर पाटन के निरीक्षण के दौरान सामने आया। निरीक्षण के समय विद्यार्थियों को एक ही कक्ष में बैठाकर पढ़ाया जा रहा था।
शिक्षकों की कमी को लेकर पूछताछ हुई तो पता चला कि यह स्थिति कुछ दिनों की नहीं, बल्कि लंबे समय से बनी हुई है। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों तक मामला पहुंचा और स्कूल में शिक्षण व्यवस्था सुचारु रखने के निर्देश जारी किए गए।
साक्षरता अभियान के साथ स्कूल की जिम्मेदारी
मामले में भास्कर गुप्ता प्राथमिक शिक्षक एवं माध्यमिक शिक्षक के उच्च पद का प्रभार प्राप्त, एकीकृत शासकीय माध्यमिक शाला उजरोड़ को निर्देश जारी किए गए हैं। उन्हें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि साक्षरता मिशन से जुड़े कार्यों के साथ मूल विद्यालय के शैक्षणिक दायित्व का भी समुचित निर्वहन सुनिश्चित किया जाए।
किसी भी स्थिति में साक्षरता अभियान के कारण विद्यालय की पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए। निर्देशों के अनुसार संबंधित शिक्षक अब सप्ताह में केवल दो दिन साक्षरता अभियान के कार्य में रहेंगे, जबकि चार दिन मूल स्कूल में उपस्थित रहकर विद्यार्थियों की पढ़ाई की जिम्मेदारी संभालेंगे।
इसके साथ ही अधिकारियों ने निर्देशित किया कि भविष्य में विद्यालयीन कार्य प्रभावित होने अथवा इस संबंध में शिकायत मिलने पर संबंधित शिक्षक और संस्था प्रभारी की जवाबदेही तय कर नियमानुसार कार्रवाई जाएगी।









