श्रेया न्यूज़ शहडोल नीलू राठौर :- शहडोलः बच्चों और युवाओं को तंबाकू सिगरेट और अन्य नशीले पदार्थों की लत से बचाने के लिए स्कूल, कालेज और अस्पतालों के 100 गज के दायरे में तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध है। इसके बावजूद शहर में नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। जिला मुख्यालय ही नहीं जिले के कई शैक्षणिक संस्थानों और अस्पतालों के बाहर गुटखा, पान मसाला और सिगरेट लोगों को आसानी से उपलब्ध हो रही है।
प्रतिबंधित क्षेत्र में संचालित इन दुकानों के कारण बच्चों, किशोरों और मरीजों के बीच तंबाकू उत्पादों की पहुंच आसान बनी हुई है। अब जहां इसको रोकने के लिए प्रशासन ने कुछ जिम्मेदार तय किए हैं जिनको जिम्मेदारी दी गई है है कि वे इस पर अंकुश लगाने का काम करेंगे, लेकिन होता यह है कि यह अंकुश लगाने का यह काम सिर्फ रस्म अदायगी रहता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब स्कूलों और कालेजों के आसपास ही नशे का सामान उपलब्ध हो जाए तो फिर इनको इस तक पहुंचने से रोकना मुश्किल होता है। कुछ युवा जो नशे के आदी होते हैं वे युवाओं को खासकर संपन्न घरों के लड़कों को इस नशे की गर्त में धकेलने के लिए ही बैठे रहते हैं। एक बार अंगर नशे का स्वाद युवा चख लेता है तो फिर उसे लत लग जाती है। इसलिए कालेज व स्कूलों के आसपास तंबाकू उत्पाद सामग्री को बेचने परे सरकार ने सख्ती से रोक लगाकर रखी है। इसके बावजूद अंकुश लगाने में संबंधित विभाग और अधिकारी नाकाम हैं। ऐसे माहौल से युवाओं में तंबाकू सेवन के प्रति आकर्षण बढ़ता है और नशे की शुरुआत का खतरा भी बढ़ जाता है।
तंबाकू नियंत्रण कानून का उद्देश्य बच्चों और युवाओं को तंबाकू उत्पादों की आसान उपलब्धता से दूर रखना है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसकी प्रभावी निगरानी नहीं दिख रही। प्रतिबंधित क्षेत्रों में बिक्री जारी रहने से कानून के पालन और प्रशासनिक कार्रवाई की गंभीरता पर सवाल उठ रहे हैं। नियमों के तहत स्कूल, कालेज और अस्पतालों के 100 गजे के दायरे में तंबाकू उत्पादों की बिक्री प्रतिबंधित है। सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करना दंडनीय अपराध है। उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना और अन्य कानूनी कार्रवाई का प्रविधान है। इसके बावजूद अंकुश नहीं लग पा रहा है।
नियमानुसार कालेज स्कूल और अस्पतालों के आसपास तंबाकू उत्पाद की बिक्री पर रोक लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग, खाद्य विभाग और नगरपालिका के अधिकारियों की एक संयुक्त टीम को करना चाहिए। लेकिन, उनको सुध हब आती है कि हमें काम करना है जब कोई त्योहार होता है और दुकानों पर जाकर मिठाई चेक करनी हो। यही हाल नगरपालिका के स्वच्छता निरीक्षक का है उनको अपना ही काम ठीक से करने में दिक्कत होती है वह तंबाकू बिक्री स्कूलों व कालेज के पास कैसे रोकें। ले देकर बचता है स्वास्थ्य विभाग तो यहां से जरूर बीच बीच में कार्रवाई होती है जो नाकाफी है। स्कूलों कालेजों के आसपास. तो सख्ती हो या न हो पर जिला अस्पताल परिसर में मुस्तैदी दिखाई देती है। यहां बीते एक साल में 16 हजार से अधिक का जुर्माना भी वसूल किया गया।
नोडल अधिकारी डा. पुनीत का कहना है कि खाद्य और नगरपालिका का अमला सक्रिय हो जाए तो कार्रवाई करने में तेजी आ सकती है। नियमों के तहत यहां पर छापामार कार्रवाई समय-समय पर को जाना चाहिए। इतना ही नहीं स्कूलों के आसपास तो तंबाकू उत्पाद पर रोक लगना ही चाहिए।







