सीमा सिंह शहडोल -: मूल रूप से इंदौर के विवेक छापरवाल पत्नी और दो बेटों के साथ शारजाह में रह रहे थे। बीते दिनों परिवार अपने दोस्त से मिलने अबू धाबी गया था, जहां स्विमिंग पूल में डूबने से बड़े बेटे 6 साल के अयान्वित की मौत हो गई। परिवार ने वहीं अंगदान करने का फैसला लिया।
- दिल, लिवर और दोनों किडनी का दिया दान
- अंगदान के बाद इंदौर लाया गया पार्थिव शरीर
- 2 साल के भाई ने मुखाग्नि दी, हर आंख नम
इंदौर के छह वर्षीय अयान्वित ने अबू धाबी में चार लोगों को नया जीवन दिया। इंदौर के श्याम छापरवाल परिवार के पुत्र विवेक व बहू पूजा अपने छह और दो वर्षीय बच्चों के साथ शारजाह में रह रहे थे। कुछ दिन पूर्व वह अपने मित्र के यहां अबूधाबी गए थे, जहां अयान्वित स्विमिंग पुल में डूब गया था।
उसे शेख खलीफा हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान पांच अप्रैल को डॉक्टर नाउम्मीद हो गए। उन्होंने परिवार को बता दिया कि यदि परिवार ऑर्गन डोनेशन के लिए तैयार हो जाए तो अयान्वित कम से कम चार लोगों को जीवन दे सकता है। अंततः स्वजन ने अंगदान की सहमति दे दी।

दिल, लिवर और दोनों किडनी का दान
- नौ अप्रैल को सभी सरकारी प्रक्रिया पूरी कर डॉक्टरों ने बच्चे का दिल, लिवर और दोनों किडनी का दान किया। उन्होंने बताया कि इन अंगों से चार लोगों जीवन बचेगा। छापरवाल परिवार के सभी सदस्य इंदौर में रहते हैं, इसलिए बालक अयान्वित का दाह संस्कार इंदौर में करने का निर्णय लिया गया।
- अयान्वित के माता-पिता और छोटे भाई को लेकर इंडिगो की फ्लाइट 12 अप्रैल रात इंदौर आई। 13 अप्रैल को यहां तिलक नगर मोक्षधाम में उसका दाह संस्कार हुआ। उपस्थित स्वजन के आंसू नहीं थमे, जब उसके दो वर्षीय भाई अतुलित ने अपने बड़े भाई को मुखाग्नि दी।

स्विमिंग पुल में डूबने से पड़ा दिल का दौरा
अखिल भारतीय माहेश्वरी महासभा के मीडिया प्रभारी रामस्वरूप मूंदड़ा ने बताया कि छापरवाल दंपती शारजाह में रहते थे और अपने मित्र के यहां अबूधाबी गए थे। अबूधाबी में स्विमिंग पुल में डूबने से बालक को हृदयाघात हुआ था।
अबूधाबी में आर्गन डोनेशन के लिए सरकारी अनुमति तुरंत मिल गई। अबूधाबी सरकार ने अयान्वित के पूरे इलाज से लेकर अबूधाबी से इंदौर उसके घर तक एंबुलेंस से भेजने का पूरा खर्च उठाया है।
अबूधाबी सरकार द्वारा अयान्वित के माता-पिता का विशेष सम्मान भी किया जाएगा। इसके लिए माता-पिता 24 अप्रैल को पुनः अबूधाबी पहुंचेंगे। माहेश्वरी महासभा के सभापति संदीप काबरा ने माता-पिता एवं परिवार के साहसिक निर्णय की सराहना की है।










