श्रेया न्यूज़ शहडोल नीलू राठौर :- शहडोल । 90 का दशक जब शहडोल का आदिवासी बहुल गांव विचारपुर को कोई नहीं जानता था। गांव के ही सुरेश कुंडे गांव की बदहाली से दुखी थे। तब गांव में नशे का बोलबाला था। तभी उन्होंने सोचा कि क्यों न फुटबाल से लोगों को जोड़ा जाए।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विचारपुर गांव को मिनी ब्राजील का दर्जा दियाए लेकिन गांव में फुटबाल क्रांति लाने वाले सुरेश कुंडे अब भी गुमनाम हैं। स्थानीय प्रशासन ने उनका नाम प्रधानमंत्री तक नहीं पहुंचाया। फिलहाल सुरेश कुंडे बीमार हैं। विचारपुर को ष्मिनी ब्राजीलष् बनाने वाले असली हीरो को अब असली पहचान का इंतजार है। उनके बेटे नीलेंद्र कुंडे पिता की विरासत संभाल रहे हैं और बच्चों को निश्शुल्क प्रशिक्षण दे रहे हैं।
नौकरी छोड़ीए मैदान बनाने में बहाया पसीना
आजादी से पहले सुरेश कुंडे के बड़े भाई मुरलीधर कुंडे रेलवे में नौकरी करते थे और फुटबाल खेलते थे। उन्हीं से प्रशिक्षण प्राप्त लेकर सुरेंद्र कुंडे ने ओपन नेशनल तक के फुटबाल मैच खेले। सुरेश कुंडे ने रेलवे और कालरी में नौकरी कीए लेकिन फुटबाल में रुचि होने के कारण नौकरी छोड़ दी और पूरा जीवन फुटबाल के लिए खपा दिया। उन्होंने पहले छोटा मैदान तैयार कियाए फिर ग्रामीणों के सहयोग से बड़ा मैदान बनाया। उन्होंने ऐसा माहौल बनाया कि अब हर घर में एक फुटबाल खिलाड़ी पैदा हो रहा है।
भीषण गर्मी में रेतीले मैदान में कर रहे अभ्यास
संभागीय मुख्यालय से सटे आदिवासी बहुल विचारपुर गांव में फुटबाल धर्म है। रविवार को तापमान 44 डिग्री को छू रहा थाए लेकिन यहां के खिलाडिय़ों के हौसले पर कोई असर नहीं दिखा। सुबह पांच और शाम ढलने तक नंगे पांवए रेतीले ऊबड़.खाबड़ मैदान पर बच्चों से लेकर युवा तक फुटबाल को अपने पैरों पर नचाते दिखे। समूह बनाकर कोई बाइसिकिल किक लगा रहा थाए तो कोई पेनल्टी कार्नर पर निशाना साध रहा था। जर्मनी में प्रशिक्षण प्राप्त कर लौटे युवा फुटबालर अब नए खिलाडिय़ों को इंटरनेशनल तकनीक सिखा रहे हैं। ड्रिब्लिंगए पासिंगए पोजिशनल प्ले से लेकर मेंटल फिटनेस तक का पाठ पढ़ाया जा रहा है।
ऐसे बनी विचारपुर की पहचान
.01 जुलाई 2023 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की शहडोल जिले के लालपुर में आमसभा हुई। पकरिया गांव में विचारपुर के खिलाडिय़ों से मिलकर मोदी ने उनकी सराहना की और विचारपुर को मिनी ब्राजील का दर्जा दिया था। इसके बाद पाडकास्ट में उन्होंने विचारपुर का जिक्र किया। तीसरी बार मन की बात में भी उन्होंने विचारपुर के खिलाडिय़ों की तारीफ की।
- 4 से 12 अक्टूबर २०25 तक राज्य सरकार की ओर से जर्मनी में विचारपुर के फुटबाल खिलाड़ी सुहानी कोलए सानिया कुंडेए प्रीतम कुमारए वीरेंद्र बैगाए मनीष घासिया और कोच लक्ष्मी सहीश ने प्रशिक्षण लिया।
- 24 नवंबर 2025 को जर्मन फुटबालर कोच डाइटमार वीर्यस डार्फर विचारपुर आए थे। यहां खिलाडिय़ों से मिले और सुरेश कुंडे के घर जाकर मुलाकात की थी।
अभी ये है स्थिति
- विचारपुर स्टेडियम के लिए बाउंड्रीवाल और मैदान समतलीकरण की राशि स्वीकृत हो चुकी है।
- टेंडर भी हो गयाए पर काम आज तक शुरू नहीं हुआ।
- मैदान आज भी पथरीला हैए घास नहीं हैए न पीने के पानी की व्यवस्था है।
- स्टेडियम बन जाए और सिंथेटिक ट्रैक मिल जाए तो कई खिलाड़ी देश का नाम रोशन कर सकते हैं।
मैदान की स्थिति अच्छी नहीं है। इसके बाद भी जुनून कम नहीं हुआ है। सुविधाओं के नाम पर अभी तक तो कुछ नहीं हुआए लेकिन आगे हो सकता है हो। मैदान में रोज लगभग 100 बच्चे आ रहे हैं।







