श्रेया न्यूज़ शहडोल नीलू राठौर :- शहडोलः वन्यजीवों और वन क्षेत्र की सुरक्षा में जान जोखिम में डालने वाले वनकर्मियों को अब कानूनी सुरक्षा प्राप्त हो गई है। ड्यूटी के दौरान ने आग्नेयास्त्र का प्रयोग करने वाले वन कि अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ बिना पूर्व स्वीकृति के कोई आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं किया जा सकेगा।
वन विभाग द्वारा संरक्षित और आरक्षित वन क्षेत्रों में वन्यजीवों की संवेदनशीलता और वन कर्मियों पर बढ़ते खतरों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। इस प्रविधान के तहत वनरक्षक, वनपाल, उप वन क्षेत्रपाल, सहायक वन संरक्षक सहित सभी वन विभाग के वर्दीधारी अधिकारी-कर्मचारी शामिल होंगे।
यदि किसी वनकर्मी द्वारा ड्यूटी के दौरान आग्नेयास्त्र का प्रयोग किया जाता है, तो प्रत्येक घटना की जांच संबंधित क्षेत्र के कार्यपालिक दंडाधिकारी करेंगे। एफआइआर या गिरफ्तारी तब तक नहीं होगी, जब तक न्यायिक जांच में यह प्रमाणित न हो जाए ‘कि हथियार का प्रयोग अनुचित था। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस निर्णय से वनकर्मियों का मनोबल बढ़ेगा।
डीएफओ उत्तर तरुण वर्मा ने बताया कि मध्यप्रदेश शासन ने 7 अगस्त को जारी अधिसूचना में स्पष्ट कर दिया है कि ड्यूटी के दौरान आग्नेयास्त्र का प्रयोग करने वाले वन अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ अब बिना पूर्व स्वीकृति के कोई आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं किया जा सकेगा। सरकार ने माना है कि कर्तव्य पालन के दौरान आग्नेयास्त्र चलाने पर कर्मियों के विरुद्ध अनावश्यक या दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई की संभावना बनी रहती है।
इस प्रविधान के तहत वनरक्षक, वनपाल, उप वन क्षेत्रपाल, वन क्षेत्रपाल, सहायक वन संरक्षक, उप वनमंडल अधिकारी, उप वन संरक्षक, उप संचालक, वनमंडल अधिकारी, क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक और क्षेत्र संचालक सहित वन एवं वन्यजीव संरक्षण, संवर्धन और प्रबंधन से जुड़े सभी अधिकारी-कर्मचारी आएंगे। उन्होंने बताया कि आदेश राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से लागू माना जाएगा।














