श्रेया न्यूज़ शहडोल द्रोपती धुर्वे :- MP Board Exam: खरगोन में शिक्षा व्यवस्था की गंभीर लापरवाही सामने आई है, जहां गायत्री विद्यापीठ हायर सेकेंडरी स्कूल के 23 विद्यार्थी बोर्ड परीक्षा से वंचित रह गए। स्कूल प्रबंधन द्वारा लगातार आश्वासन दिए जाने के बावजूद परीक्षा से पहले प्रवेश पत्र नहीं मिले। नाराज विद्यार्थियों और अभिभावकों ने खंडवा–बड़ौदा राष्ट्रीय राजमार्ग पर चार घंटे चक्का जाम कर दिया।
खरगोन: भीकनगांव स्थित गायत्री विद्यापीठ हायर सेकेंडरी स्कूल में बड़ी लापरवाही सामने आई है। कक्षा 10वीं के 13 और 12वीं के 10, कुल 23 विद्यार्थियों के परीक्षा आवेदन और फीस समय पर जमा नहीं किए गए। स्कूल प्रबंधन और प्राचार्य लगातार विद्यार्थियों व पालकों को भरोसा दिलाते रहे कि प्रवेश पत्र मिल जाएंगे, लेकिन परीक्षा के एक दिन पहले तक किसी छात्र को एडमिट कार्ड नहीं मिला। विद्यार्थियों के हाथ में न प्रवेश पत्र था और न ही परीक्षा में बैठने की कोई गारंटी। इस स्थिति से घबराए विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों में भारी आक्रोश फैल गया।
सोमवार शाम को फूटा गुस्सा, चक्का जाम
सोमवार शाम को विद्यार्थियों, पालकों, विद्यार्थी परिषद और नगरवासियों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए खंडवा–बड़ौदा राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्का जाम कर दिया। यह जाम लगभग 4 घंटे तक चला। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि स्कूल ने फीस लेने के बाद भी बोर्ड की औपचारिकताएं पूरी नहीं कीं। जांच में सामने आया कि स्कूल प्रिंसिपल और संचालक ने न तो छात्रों का डेटा अपडेट किया और न ही बोर्ड संबंधित प्रक्रिया समय पर पूरी की। इसे केवल लापरवाही नहीं बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ बताया गया।
पुलिस सूचना तंत्र पर भी सवाल
सबसे गंभीर सवाल पुलिस प्रशासन पर उठे। चक्का जाम थाना परिसर से मात्र 50 मीटर दूर हो रहा था, लेकिन सूचना वरिष्ठ अधिकारियों तक लगभग एक घंटे तक नहीं पहुंची।
अब दो प्रश्न खड़े हुए-
- सूचना नहीं पहुंची तो सूचना तंत्र की अक्षमता?
- सूचना पहुंची लेकिन कार्रवाई नहीं हुई तो संवेदनहीनता?
प्रदर्शनकारियों ने पुलिस प्रशासन से जवाबदेही तय करने की मांग की है।
शिक्षा विभाग और BEO की भूमिका संदिग्ध
घटना ने शिक्षा विभाग को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (बी.ईओ.) के निरीक्षण पर सवाल उठे हैं। लोगों का कहना है कि यदि नियमित निरीक्षण होता तो फीस जमा होने के बाद डेटा अपडेट न होना और बोर्ड पोर्टल पर नाम दर्ज न होना जैसी गंभीर गड़बड़ी पहले ही पकड़ में आ जाती। आरोप लगाया गया कि निरीक्षण केवल कागजों तक सीमित रह गया और वास्तविक जांच नहीं हुई।
विद्यार्थियों के वर्ष की भरपाई कौन करेगा?
सबसे बड़ा प्रश्न यह बना हुआ है कि जो विद्यार्थी परीक्षा नहीं दे पाए उनके एक वर्ष का नुकसान कौन भरेगा। अभिभावकों ने कहा कि आश्वासन से साल वापस नहीं आएगा और एक रात का तनाव उनकी पीड़ा की कीमत नहीं हो सकता। यह मामला केवल स्कूल की लापरवाही नहीं बल्कि स्कूल प्रबंधन, पुलिस प्रशासन और शिक्षा विभाग तीनों की संयुक्त विफलता बताया जा रहा है।
राजनीतिक स्तर पर भी उठे सवाल
घटना ने राजनीतिक हलकों में भी चर्चा छेड़ दी है। गृह ग्राम की जिला अध्यक्ष भाजपा से होने के बावजूद चार घंटे तक चक्का जाम चलता रहा। लोगों ने सवाल उठाया कि क्या उन्हें घटना की जानकारी नहीं थी, और यदि थी तो देरी क्यों हुई। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कहा कि यदि जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो आगे और बड़ा आंदोलन होगा।











