श्रेया न्यूज़ शहडोल द्रोपती धुर्वे :- शहडोलः जिले के अस्पतालों में मरीजों का इलाज तो होता है, लेकिन नियमित साफ-सफाई नहीं होती है। मेडिकल कालेज, जिला अस्पताल और सिविल अस्पतालों में भी निर्धारित मापदंडों के अनुसार सफाई व्यवस्था संचालित नहीं हो पाती है। दिन में कम से कम तीन बार पूरी सफाई करने का प्रविधान है और हर घंटे शौचालय व वार्डों में जहां भी गंदगी दिखे साफ करने की व्यवस्था लागू है, लेकिन अभी तो एक या दो बार ही सफाई कराई जाती है।
यही हाल मेडिकल कालेज के अस्पताल का भी है. जबकि कर्मचारी व सफाई से संबंधित सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं और एक बड़ा बजट खर्च भी हो रहा है। इतना ही नहीं साफ-सफाई व्यवस्था को ठीक करने के लिए अलग से प्रबंधक भी पदस्थ है, लेकिन सुविधाओं में अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा है। ओपीडी से लेकर वार्ड के अंदर और बाहर परिसर की साफ-सफाई पर बड़ा बजट मरीजों के नाम से अस्पताल प्रबंधन खर्च कर रहा है, लेकिन मापदंड के अनुसार व्यवस्था सुधर नहीं रही है। अस्पतालों में उपचार के लिए आए मरीजों को उपचार देने के साथ साफ सफाई को प्राथमिकता देनी है, जिसके शासन-प्रशासन स्तर पर लगातार दिशा निर्देश व अभियान चलते रहते हैं। इनके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों का हाल और भी अधिक खराब है। साफ सफाई की निम्न व्यवस्था के कारण यहां आने वाले मरीज संक्रामक रोगों के खतरे से भी भयाक्रांत रहते हैं। अस्पताल परिसर में कूड़े-कचरे का अंबार लगा रहता है।
हालांकि, कथित रूप से यहां प्रतिदिन सफाई कर्मी आते हैं और सफाई करते हैं। अस्पतालों में सफाई कर्मी कार्यरत हैं, लेकिन, ये सभी कार्य दिवस पर सही ड्यूटी नहीं करते हैं। इनकी मर्जी से ही अस्पताल की साफ-सफाई होती है। सफाई व्यवस्था सिर्फ कागजों में ही बेहतर है। एक तरफ जहां अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ की आशा से लोग पहुंचते हैं, वहीं दसरी ओर गंदगी के कारण परेसान हो जाते हैं। यह दीगर बात है कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा सफाई व्यवस्था का दावा किया जा रहा है, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां करती है।
स्वच्छता अभियान को लेकर निकलने वाली रैली में स्वास्थ्य कर्मी भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। लोगों को साफ-सफाई की नसीहत देते नजर आते हैं, लेकिन उनके ड्यूटी करने के स्थान पर गंदगी का अंबार हास्यास्पद भी लगता है। जिला अस्पताल के मेडिकल वार्ड में भर्ती मरीज के स्वजन आरके सिंह ने बताया कि दो दिन से वे अस्पताल में हैं। वार्ड में सुबह ही सफाई होती है। शाम को खानापूर्ति की जाती है। शौचालयों में गंदगी पड़ी रहती है। कोई सफाई के लिए बोलता है, तो डांट दिया जाता है। हर घंटे के मान से तो कभी सफाई नहीं होती।
जिला अस्पताल सहित सभी अस्पतालों में साफ-सफाई की. ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पताल सफाई सभी जगह जरूरी है और कचरा प्रबंधन भी नियमानुसार होना है। यदि कही नहीं हो रहा व्यवस्था को ठीक रखना हमारी प्राथमिकता में है। यदि मापदंड के अनुसार नहीं हो रही है तो दिखवाते हैं। जिला अस्पताल हो या तो ठीक नहीं हैं, कार्रवाई होगी।
– डा. राजेश मिश्रा, सीएमएचओ शहडोल।
जिला अस्पताल के प्राइवेट वार्ड के सामने से बह रहा नाली का गंदा पानी।






