श्रेया न्यूज़ शहडोल नीलू राठौर :- शहडोल। इंसान अपनों को खोने पर शोक मनाता है, लेकिन बेजुबान कहे जाने वाले हाथी भी साथी की मौत को गहराई से महसूस करते हैं। शहडोल में ऐसी ही एक संवेदनशील तस्वीर सामने आई है, जहां करंट से मारे गए हाथी को दफनाने के बाद उसी झुंड के हाथी उसकी कब्र पर पहुंचे और देर तक वहां ठहरे। यह मंजर वन्यजीवों के सामाजिक व्यवहार और भावनात्मक जुड़ाव की मिसाल बन गया है।
मामला पश्चिम ब्यौहारी वन परिक्षेत्र के कक्ष क्रमांक पीएफ-77, बीट चचाई के अंतर्गत ग्राम चंदौली के वार्ड नंबर 7 का है। यहां खेत के पास बोरवेल के समीप करंट लगने से 15 वर्षीय नर मखना हाथी की मौत हो गई थी। वन विभाग ने नियमानुसार शव को विधिवत दफनाया था।
दफनाने के बाद जो घटनाक्रम सामने आया, उसने सबका ध्यान खींचा। जिस झुंड का मृत हाथी हिस्सा था, उसी झुंड के हाथी दफन स्थल पर पहुंचे। बताया गया कि जिस दिन मौत हुई, उस दिन भी झुंड उसी जगह लौटा था और दूसरे दिन फिर उसी स्थान पर पहुंचकर कुछ देर ठहरा। झुंड की इस मौजूदगी को मृत साथी के प्रति भावनात्मक लगाव और शोक व्यवहार के रूप में देखा जा रहा है।
उत्तर वन मंडलाधिकारी तरुणा वर्मा ने बताया कि हाथियों का स्वभाव सामाजिक होता है, वे झुंड में रहते हैं और उनके बीच गहरे सामाजिक संबंध होते हैं। जिस तरह मनुष्य प्रियजनों की मृत्यु पर शोक व्यक्त करते हैं, उसी तरह हाथियों में भी शोक जैसा व्यवहार देखा जाता है।
हाथियों में एन्सेस्ट्रल मेमोरी यानी पूर्वजों से जुड़ी स्मृति और सामाजिक व्यवहार की विशेषताएं महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। हालांकि केवल एक स्थान पर पहुंचने को वैज्ञानिक रूप से शोक सभा कहना उचित नहीं होगा, लेकिन यह दृश्य उनके आपसी जुड़ाव की संवेदनशील तस्वीर जरूर पेश करता है।












