श्रेया न्यूज़ द्रोपती धुर्वे शहडोल :- घने जंगलों में बाघों के मूवमेंट जानने के लिए लगाए गए ट्रैप कैमरे अब खुद शिकार बनते दिख रहे हैं। घुनघुटी वन परिक्षेत्र के मझगवां क्षेत्र में बाघों की गणना के लिए लगाया गया एक ट्रैप कैमरा अज्ञात चोर उठा ले गया। घटना कक्ष क्रमांक आरएफ 235 की है, जहां से करीब 10 हजार रुपये कीमत का कैमरा गायब मिला।
जानकारी के मुताबिक 1 से 2 फरवरी के बीच घुनघुटी वन परिक्षेत्र में कुल 135 ट्रैप कैमरे लगाए गए थे। इनमें से मझगवां क्षेत्र में 20 कैमरे स्थापित किए गए थे। इन कैमरों का मकसद बाघों की गतिविधियों पर नजर रखना और उनकी सटीक गणना करना था लेकिन कैमरे लगने के कुछ ही दिनों बाद एक कैमरा संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया।
घुनघुटी रेंजर अर्जुन सिंह ने पुष्टि करते हुए बताया कि मझगवां क्षेत्र से एक ट्रैप कैमरा चोरी हुआ है और इस संबंध में पाली थाने में प्राथमिकी दर्ज करा दी गई है। उन्होंने बताया कि ट्रैप कैमरे बाघों की गणना और उनकी मूवमेंट रिकॉर्ड करने के लिए लगाए जाते हैं। ये कैमरे जंगल में पेड़ों पर इस तरह लगाए जाते हैं कि जैसे ही कोई वन्य जीव सामने से गुजरता है, उसकी तस्वीर और वीडियो स्वतः रिकॉर्ड हो जाती है।
दरअसल बाघों की गिनती एक संवेदनशील और वैज्ञानिक प्रक्रिया है। ट्रैप कैमरों के जरिए बाघों की धारियों के पैटर्न की पहचान कर उनकी संख्या तय की जाती है। ऐसे में एक भी कैमरे की कमी पूरी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।
चोरों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि अब वे सरकारी सामान को भी नहीं छोड़ रहे। सवाल यह है कि आखिर जंगल के भीतर लगे उपकरण तक पहुंच किसने और कैसे बनाई? क्या यह किसी शरारती तत्व का काम है या फिर किसी संगठित गिरोह की नजर वन विभाग के उपकरणों पर है? फिलहाल जंगल में बाघों की निगरानी के साथ अब कैमरों की सुरक्षा भी बड़ी चुनौती बन गई है। वन विभाग और पुलिस दोनों ही मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश में जुटे हैं।










